हरियाणा विधान सभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने समिति प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए विस्तृत योजना बनाई है। बजट सत्र शुरू होने से पूर्व वीरवार शाम उन्होंने सभी समितियों के चेयरपर्सन्स के साथ बैठक कर इसका खाका तैयार किया। इस दौरान उन्होंने समितियों की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए अनेक निर्देश भी दिए तथा चेयरपर्सन्स से उनके अनुभवों के आधार पर सुझाव भी लिए गए।
विस अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने कहा कि कमेटियों की कार्यप्रणाली को सुदृढ़ करके ही कार्यपालिका को विधायिका के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने गत वर्ष अपने 13 राज्यों में हुए अध्ययन दौरों का अनुभव साझा करते हुए बताया कि सभी प्रदेशों में विधान सभा समितियों की सिफारिशों की स्वीकार्यता लगभग एक जैसी ही है। उन्होंने कहा कि हमें योजनाबद्ध ढंग से इस दिशा में काम करना है। जमीन से जुड़े बिन्दुओं पर गहन अध्ययन करना होगा। हमारी सिफारिशें (रिकमेंडेशन्स) जितनी सटीक होंगी उनका प्रभाव उतना ही ज्यादा होगा। नियमित रूप से फालोअप लेना होगा। हमें इस पूरी प्रणाली को उच्चतम स्तर तक लेकर जाना है।
उन्होंने कहा कि हमारी संवैधानिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में विधायिका और कार्यपालिका एक दूसरे प्रतिद्वंद्वी न होकर एक दूसरे की सहयोगी संस्थाएं हैं। दोनों संस्थाओं का मूल उद्देश्य जन हित को साधना है। इस उद्देश्य की पूर्ति में विधान सभा की कमेटियां सबसे प्रभावी उपकरण हैं।
उन्होंने कहा कि आगामी वित्त वर्ष की कमेटियों के गठन करते समय कमेटियों में सदस्यों की पुनरावृत्ति का ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि समितियों की संख्या के अनुपात में सदन की सदस्य संख्या अपेक्षाकृत कम है। इसके चलते अनेक सदस्य एक से ज्यादा कमेटियों में भागीदारी करते हैं। विस अध्यक्ष ने कहा कि समितियों की सिफारिशों का पूर्णत: क्रियान्वयन तभी संभव है जब सदस्य विषय की गहराई में उतरकर सिफारिशें तैयार करेंगे।
इसके साथ ही उन्होंने स्पोट विजिट, दूसरे राज्यों में होने वाले अध्ययन दौरों, विधायकों का व्यक्तिगत विकास, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रम योजना पर भी विस्तार से विचार रखे। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीक का प्रयोग कर इन सभी कार्यक्रमों को विस्तार दिया जाएगा। इस दौरान समिति चेयरपर्सन्स ने भी अपने सुझाव रखे। इस बैठक में विधान सभा उपाध्यक्ष डॉ. कृष्ण लाल मिड्ढा, चेयरपर्सन रामकुमार गौतम, भारत भूषण बत्रा, आफताब अहमद, लक्ष्मण यादव, रामकुमार कश्यप, विनोद भ्याणा, कृष्णा गहलावत, घनश्याम दास अरोड़ा, भगवान दास कबीरपंथी मौजूद रहे।


